एटा, अगस्त 14 -- Etah News: श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़े मंदिर में प्रातः अभिषेक, पूजन के पश्चात आचार्यश्री ने शारदे वंदना का उच्चारण किया। दोपहर में भक्तामर प्रशिक्षण शिविर में आचार्यश्री ने बताया कि भक्तामर स्तोत्र आचार्य मानतुंग स्वामी की एक ऐसी अमर कृति है, जिसका स्थान संपूर्ण भक्ति काव्यों में सर्वोपरि है। भक्ति का अर्थ ही है जो भक्त को भगवान से जोड़ दे। सच्ची भक्ति है। इस स्तोत्र में आचार्यश्री ने भगवान की आराधना, उपासना पूर्ण समर्पण भाव से की है। भक्तामर स्तोत्र को कभी भी पढ़ सकते हैं। इसमें दिन-रात का भेद नहीं है। यह स्तोत्र आज भी कई सिद्धियों को सहज ही प्रदान कर देता है। एटा के कोसमा ग्राम के गौरव आचार्य विमल सागर महाराज महान संत थे। उन्होंने सबसे ज्यादा ऋद्धि मंत्रों की साधना की थी। कार्यक्रम में शैलेन्द्र जैन, उमेश उड़ेसर, द...