नई दिल्ली, अप्रैल 23 -- सुप्रीम कोर्ट ने गुजारा भत्ता से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष न्यायालय का कहना है कि अगर DNA टेस्ट से साबित हो जाता है कि शख्स बच्चे का बायोलॉजिकल पिता नहीं है, तो उसे गुजारा देने के निर्देश नहीं दिए जा सकते। कोर्ट ने कहा कि फिर भले ही बच्चे का जन्म शादी के दौरान ही क्यों न हुआ हो। इसके साथ ही अदालत ने महिला की तरफ से दाखिल अपील को खारिज कर दिया। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच महिला की अपील पर सुनवाई कर रही थी। महिला ने बेटी को गुजारा देने के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। इस दौरान अदालत ने इंडियन एविडेंस एक्ट 1872 (भारतीय साक्ष्य अधिनियम में धारा 116) और पिता का पता करने लिए होने वाली आधुनिक जांचों के बीच संबंध पर चर्चा की गई। यह भी पढ़ें- पीएम के राष्ट्र के नाम...