धनबाद, अक्टूबर 26 -- Dhanbad News: मंद-मंद बहती हवाएं, गुलाबी ठंड का एहसास और आसमान में अपनी सोलह कलाओं की आभा बिखेरता शरद पूर्णिमा का चांद। चांदनी की दूधिया चादर में लिपटी रविवार की रात कोयलांचल में आस्था, प्रेम और लोकपरंपराओं के नाम रही। कहीं नवदंपतियों के सुखमय दांपत्य जीवन की कामना के साथ कोजागरा की रस्में निभाई गईं, तो कहीं मां लक्खी की आराधना में दीप जले। गुजराती समाज ने शरद पूनम मनाई, वहीं वैष्णव समाज में रास पूर्णिमा का उल्लास छाया रहा। अलग-अलग परंपराएं थीं, लेकिन हर प्रार्थना में सुख-समृद्धि, प्रेम और खुशहाली की कामना एक-सी थी। आश्विन मास की पूर्णिमा पर चंद्रमा की अनुपम छटा ने रात को खास बना दिया। धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है। इसी विश्वास के साथ लोगों ने खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे...