नई दिल्ली, सितम्बर 30 -- Delhi News: नई दिल्ली। अभिनव उपाध्याय/आशीष सिंह एक कप कॉफी कभी दोस्तों के साथ घंटों बैठकर गपशप, बीते दिनों को याद करने, राजनीति, साहित्य सामाजिक स्थिति पर चर्चा करने का बहाना हुआ करती थी, अब वही एक कप कॉफी कई बार लैपटॉप खोलकर मीटिंग करने, काम निपटाने या किसी नए रिश्ते की शुरुआत का साथी बन गया है। पुराने कॉफी हाउस आज भी अपने पुराने ग्राहकों को स्वाद, किस्सों और यादों के लिए खींच रहे हैं, जबकि नए कॉफी हाउस नई पीढ़ी को जोड़ने के साथ काम और मेलजोल की नई जगह बनते जा रहे हैं। कॉफी का स्वाद भले दोनों जगह मौजूद है, लेकिन उसके साथ बैठने का अंदाज बदल गया है।

पुराने कॉफी हाउस की संस्कृति पुराने कॉफी हाउस में आने वालों के लिए जगह महज खाने-पीने का ठिकाना नहीं है। यहां कई लोग वर्षों से आ रहे हैं। एक ही मेज, वही कॉफी और परिचित ...