नई दिल्ली, जुलाई 19 -- Delhi News: नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। कड़कड़डूमा कोर्ट ने 12 साल पुराने एक कथित लूट के मामले में तीन भाइयों को बरी कर दिया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजय शर्मा-I की अदालत ने फैसले में पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश किए गए बिना मुहर और बिना हस्ताक्षर वाले 'समझौते' के संदिग्ध दस्तावेज को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिस समझौते के आधार पर पुलिस केस को सही साबित करने का दावा कर रही थी, उस पर न तो थाने की कोई मुहर थी और न ही जांच अधिकारी के हस्ताक्षर, जिसके चलते आरोपी खेमचंद उर्फ बबलू, शौकीन पाल और देवेंद्र उर्फ पिंटू को बरी कर दिया गया。

मामले का इतिहास यह मामला साल 2014 का है। शिकायतकर्ता दीपक के मुताबिक, उसने किश्त पर एक टाटा एस (छोटा हाथी) खरीदी थी, लेकिन बीमारी के कारण वह छह-सात किश्तें नहीं...