देहरादून, सितम्बर 26 -- Dehradun News: मसूरी, संवाददाता। आर्य उपदेशक डॉ. वीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि सुखी व्यक्ति के प्रति मित्रता, दुःखी व्यक्ति के प्रति करुणा, विद्वान आचार्यों एवं धर्मात्मा लोगों के प्रति प्रसन्नता अर्थात मुदिता तथा दुष्ट व्यक्ति के प्रति उपेक्षा का भाव रखना चाहिए। इन चार भावों को मन में धारण करने से ही मनुष्य ईश्वर प्राप्ति के मार्ग पर अग्रसर होता है।

उत्सव कार्यक्रम आर्य समाज मसूरी के त्रिदिवसीय वार्षिकोत्सव के अवसर पर वैदिक हवन, व्याख्यान और भजन संध्या का आयोजन किया गया।

दुर्गुणों का त्याग कार्यक्रम में आर्यउपनिदेशक डा.शास्त्री ने कहा कि उल्लू के समान मोह, भेड़िये के समान क्रोध, कुत्ते के समान ईर्ष्या, चिड़े के समान कामना, गरुड़ के समान अहंकार और गिद्ध के समान लोभ रखने वाला व्यक्ति ईश्वर के मार्ग पर नहीं चल सकता। ...