देहरादून, अक्टूबर 24 -- Dehradun News: देहरादून। पहाड़ों की रानी मसूरी पर बढ़ते पर्यटन, अनियंत्रित निर्माण और बुनियादी सुविधाओं के दबाव का मुद्दा एक बार फिर उठाया गया है। सिटिजन्स फॉर ग्रीन दून और अनूप नौटियाल ने आरोप लगाया है कि मसूरी की वहन क्षमता को लेकर सरकारी रिपोर्टों में दी गई चेतावनियों के बावजूद अब तक जरूरी कदम नहीं उठाए गए। इस मामले में सितंबर 2026 में उत्तराखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। संगठन के अनुसार, वर्ष 2001 में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) की रिपोर्ट में मसूरी की भौगोलिक सीमाओं का हवाला देते हुए नए निर्माण पर रोक लगाने की जरूरत बताई गई थी। इसके बाद राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देश पर गठित नौ सदस्यीय समिति ने जुलाई 2023 में मसूरी की वहन क्षमता पर स्थिति रिपोर्ट पेश की। इ...