देहरादून, अक्टूबर 5 -- Dehradun News: देहरादून। प्रमुख संवाददाता प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। विकास और प्रकृति के बीच संतुलन जरूरी है। बाघ के साथ उसके प्राकृतिक आवास और अन्य प्रजातियों का संरक्षण भी किया जाना चाहिए। ये बात भारतीय वन्यजीव संस्थान के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक और द कॉर्बेट फाउंडेशन के सलाहकार प्रो. कमर कुरैशी ने ग्राफिक एरा में आयोजित वन्यजीव सप्ताह के दौरान सोमवार को कही। यह भी पढ़ें- बच्चों को दी वन्य जीव संरक्षण की जानकारीमानवीय दबाव और अवैध व्यापार उन्होंने मानवीय दबाव और अवैध वन्यजीव व्यापार को बड़ी चुनौती बताया। कुलपति डॉ. नरपिंदर सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, कैमरा ट्रैप और पर्यावरणीय डीएनए जैसी तकनीकों से वन्यजीव निगरानी और संरक्षण को नई दिशा मिल रही ह...