दरभंगा, जुलाई 15 -- Darbhanga News: दरभंगा, नगर संवाददाता। इतिहास की एक नयी धारा 90 के दशक में आयी, जिसे नव्य इतिहास शास्त्र कहा गया है, जो साहित्य को इतिहास का दर्जा देता है। इतिहास सिर्फ राजा-महाराजाओं का ही नहीं, बल्कि जन सामान्य का भी होना चाहिए। लनामिवि के पीजी इतिहास विभाग में इतिहास और साहित्य का अंतर्संबंध विषय पर व्याख्यान देते हुए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पीजी हिंदी विभाग के प्राध्यापक प्रो. कमलानंद झा ने उक्त बातें कही। प्रो. झा ने इतिहास और साहित्य के रिश्ते को आत्मीय एवं जटिल बताते हुए कहा कि अधिकांश साहित्यकारों की ऐतिहासिक रचनाओं में कल्पना इतनी हावी हो जाती है कि वो न तो इतिहास रह पाता है और न ही बेहतर साहित्य ही बन पाता है। उन्होनें हिन्दी साहित्य के इतिहास को अंतर्विरोधों और अंतर्द्वंदों का इतिहास कहा।

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