चतरा, अक्टूबर 23 -- Chatra News: सिमरिया, निज प्रतिनिधि। झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया अनुमंडल क्षेत्र में अवैध अफीम की खेती का इतिहास तीन दशक पुराना है। नब्बे के दशक में गिद्धौर और पथलगड़ा प्रखंडों से शुरू हुआ यह काला कारोबार आज पूरे इलाके के लिए एक लाइलाज नासूर बन चुका है। कम लागत में अधिक मुनाफे की चाहत और उस दौर में उग्रवादियों के कड़े संरक्षण ने इस जहर की फसल को तेजी से पनपने का मौका दिया। नब्बे के दशक में जंगली और दुर्गम इलाकों में नक्सलियों के खौफ के कारण पुलिस और वन विभाग जाने से कतराते थे। इसी सुदूर क्षेत्र का फायदा उठाकर उग्रवादियों के संरक्षण और स्थानीय प्रशासनिक मिलीभगत से अफीम की खेती की शुरुआत हुई। शुरुआती दौर के दुष्परिणामों को नजरअंदाज कर लोग इस मकड़जाल में फंसते चले गए। झारखंड गठन के बाद यह धंधा और तेजी से बढ़ा। पंजाब, उत्तर...