पटना, सितम्बर 12 -- कौशलेंद्र मिश्रा, पटना। बिहार में एक विभाग ऐसा भी है जिसके अफसरों को लगभग 19 साल से स्थायी ठौर-ठिकाना नहीं मिल पाया है। एक अदद से उन्हें दफ्तर, कुर्सी, स्टाफ और वाहन की सुविधा नहीं मिली हैं। साल 2007 में बिहार सरकार ने एससी-एसटी कल्याण विभाग का अलग से गठन किया था। दलित और आदिवासी समुदाय के कल्याण के लिए काम करने वाले अफसरों की ही सरकार ने 19 साल में कोई सुध नहीं ली है। बिहार के 534 प्रखंडों में तैनात कल्याण पदाधिकारियों को कभी बीडीओ, तो कभी प्रखंड पंचायतीराज पदाधिकारी के चैंबर में बैठने की जगह खोजती रहनी पड़ती है। प्रखंड कल्याण पदाधिकारियों की नियुक्ति बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के जरिए होती है। बिहार में अभी प्रखंड कल्याण पदाधिकारी के कुल 517 पद स्वीकृत हैं। इनमें 138 प्रखंड कल्याण पदाधिकारी दो साल के ट्रेनिंग प्रोग्र...