Biharsharif News: लुप्त होती परंपरा : पहले जिउतिया पर 9 दिन सजता था नाटकों का मंच, अब सिर्फ उपवास तक सिमटा महापर्व
बिहारशरीफ, अक्टूबर 2 -- Biharsharif News: लुप्त होती परंपरा : पहले जिउतिया पर 9 दिन सजता था नाटकों का मंच, अब सिर्फ उपवास तक सिमटा महापर्व आधुनिकता की चकाचौंध में गुम हुई बहुरूपियों की कला, अब गिने-चुने गांवों में ही निकलता है झुमटा बुजुर्गों का दर्द- कला और बोलने का हुनर सिखाने वाली इस विरासत से आज की पीढ़ी है अनजान थरथरी, निज संवाददाता। संतान की लंबी उम्र के लिए किया जाने वाला जीवित्पुत्रिका (जिउतिया) व्रत अब सिर्फ माताओं के निर्जला उपवास और पूजा-पाठ तक सिमट कर रह गया है। बीसवीं सदी तक इस पर्व की रंगत ही कुछ और थी। यह भी पढ़ें- नहाय खाय के साथ जिउतिया का तीन दिवसीय अनुष्ठान शुरूप्राचीन उत्सव की यादें आश्विन महीना शुरू होते ही गांवों में नौ दिनों तक कला और संस्कृति का मेला लग जाता था। नुक्कड़ नाटक और बहुरूपियों के जरिए सामाजिक कुरीतियों प...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.