नई दिल्ली, मई 24 -- भगवद गीता जीवन जीने की कला सिखाती है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया कि सच्चा योद्धा वह नहीं, जो कभी हारता नहीं, बल्कि वह है जो हार मानने से इनकार कर देता है। गीता उन लोगों की खासियत बताती है, जो हर मुश्किल में भी मजबूती से खड़े रहते हैं। ये लोग परिस्थितियों से नहीं, बल्कि अपनी आंतरिक शक्ति से जीत हासिल करते हैं।कर्मयोगी व्यक्ति कभी हार नहीं मानता गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं -'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥' (भगवद गीता - अध्याय 2, श्लोक 47) अर्थात् तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल में कभी नहीं। कर्मयोगी व्यक्ति सिर्फ अपना कर्तव्य करता रहता है। उसे नतीजे की चिंता नहीं होती। असफलता आने पर वह टूटता नहीं, बल्कि और ज्यादा मेहनत करता है। वह जानता है कि ...