भागलपुर, अक्टूबर 14 -- Bhagalpur News: कहलगांव, निज प्रतिनिधि। भक्ति की कोई उम्र नहीं होती और भगवान का नाम किसी भी भाव से लेने पर जीव का कल्याण होता है। इसलिए जीवन में बचपन से ही भक्ति का बीज बोना चाहिए। ये बातें नाथलोक कॉलोनी स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथावाचिका किंकर किशोरी ने ध्रुव चरित्र और अजामिल की कथा का प्रसंग सुनाते हुए कहीं। ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भक्त ध्रुव को मात्र छह वर्ष की उम्र में ही भगवान की प्राप्ति हो गई थी। इससे स्पष्ट होता है कि प्रभु की भक्ति के लिए उम्र कोई बाधा नहीं है। यह भी पढ़ें- Bhagalpur News: चरित्र निर्माण में सत्संग और संगति का महत्वपूर्ण योगदान : किंकर किशोरी उन्होंने कहा कि यदि भगवान को कुछ अर्पित करना ही है, तो बचपन के खिले हुए फूल के समान जी...