भागलपुर, अगस्त 19 -- Bhagalpur News: किशनगंज। वरीय संवाददाता किसी गंभीर मरीज को उच्च चिकित्सा संस्थान भेजना कई बार उपचार की अनिवार्य कड़ी होता है, लेकिन हर गंभीर मरीज के लिए रेफरल ही पहला विकल्प हो, तो इससे मरीज और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है। रेफरल के दौरान समय, परिवहन और मरीज की स्थिति बिगड़ने का जोखिम भी जुड़ा होता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए किशनगंज में नई रेफरल नीति के तहत अब पहले यह आकलन किया जा रहा है कि मरीज का उपचार जिले में उपलब्ध संसाधनों और विशेषज्ञ सेवाओं से संभव है या नहीं। जहां उपचार की क्षमता मौजूद है, वहां मरीज को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर चिकित्सा देने पर जोर है और उच्च संस्थान में रेफरल को चिकित्सकीय आवश्यकता तक सीमित किया जा रहा है। इसका असर अगस्त के आंकड़ों में विशेष रूप से दिखाई दे र...