भागलपुर, सितम्बर 21 -- Bhagalpur News: कहलगांव, निज प्रतिनिधि। अहंकार मनुष्य के पतन का कारण बनता है। इसलिए मनुष्य को जीवन में कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए। जब संसार में अत्याचार और पाप बढ़ता है तथा भक्तों पर संकट आता है, तब भगवान धर्म की रक्षा और भक्तों के कल्याण के लिए अवतार लेते हैं। उक्त बातें रविवार को सनोखर स्थित काली मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथावाचिका प्रीति किशोरी ने कहीं। उन्होंने कहा कि अहंकार भगवान का भोजन है, इससे सदैव बचना चाहिए। मनुष्य को अपने सामर्थ्य, पद और प्रतिष्ठा पर घमंड करने के बजाय विनम्रता एवं भक्ति का मार्ग अपनाना चाहिए। कथावाचिका ने गजेंद्र मोक्ष, राजा बलि और भक्त प्रह्लाद के प्रसंगों का मार्मिक वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, समर्पण और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया...