बरेली, अक्टूबर 7 -- Bareily News: दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से हार्टमैन कॉलेज रोड स्थित रामलीला ग्राउंड में चल रही सात दिवसीय भगवान शिव कथामृत के दूसरे दिन कथा व्यास डॉ. सर्वेश्वर ने समुद्र मंथन प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि हलाहल विष निकलने पर भगवान शिव ने जगत कल्याण के लिए उसे कंठ में धारण किया, जिससे वे नीलकंठ कहलाए। उन्होंने कहा कि शिव का नीलकंठ स्वरूप त्याग, सहनशीलता और परोपकार की प्रेरणा देता है। शिवभक्तों को निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर प्राणीमात्र के प्रति दया और करुणा रखनी चाहिए। कथा से पूर्व योगाचार्य अमर प्रकाश शर्मा और सीमा वर्मा ने योगाभ्यास कराया। पंडाल में महाशिवरात्रि महोत्सव भी मनाया गया। इस दौरान निशांत चौहान, धर्म प्रकाश, लखन सिंह गंगवार, राम गोपाल मिश्रा, मुदित मिश्रा, खेमपाल साहू, राजेश मिश्रा समेत अन्य ...