बरेली, नवम्बर 5 -- Bareily News: बहेड़ी,संवाददाता। दीवाली पर माटी के दीयों की खुशबू आज भी बरकरार है। बिना दीयों को जलाए दीवाली की रौशनी अधूरी सी रह जाती है। चाइनीज झालर के दौर में भी मिट्टी के दीयों का क्रेज कम नहीं हुआ है। दीवाली पर्व धन और समृद्धि का प्रतीक है। जिसमें भारतीय संस्कृति का अद्भत संगम है। इस त्यौहार पर माटी के दीयों की खुशबू आज के आधुनिक दौर में कम नहीं हुई है। चाइनीज झालर के दौर में भी हर साल दीयों की मांग में इजाफा ही हुआ है। यह भी पढ़ें- Hajipur News: दीपावली की तैयारियां में जुटे लोग, धनतेरस आजदीयों की परंपरा और महत्व दीवाली का त्यौहार 14 साल के बनवास के बाद भगवान श्रीराम,सीता जी और लक्ष्मण जी के साथ अयोध्या लौटे थे। रावण जैसे बुराई के प्रतीक का अंत हुआ। उनके अयोध्या लौटने की खुशी में पूरे अयोध्या में दीये जलाए गए थे। त...