बरेली, अगस्त 26 -- Bareily News: बरेली। व्यक्ति को हर चीज का ज्ञान हो जाता है लेकिन अपने अहंकार का ज्ञान नहीं हो पाता। अहम का ज्ञान सद्गुरु की कृपा से ही संभव है। ईश्वर को बांधना है तो सबसे पहले अपने अंदर के अहम को मारो। ये बातें आनंद आश्रम में हो रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान मंगलवार को कथाव्यास सतेंद्र मोहन शास्त्री ने कही। उन्होंने कहा कि 'मैं और मेरा' ही जीव का सबसे बड़ा अहम है। जब तक यह नहीं समाप्त होगा ईश्वर को अपने प्रेम में नहीं बांधा जा सकता। भगवान को विद्या, धन, बल से नहीं रिझाया जा सकता। उन्हें तो सिर्फ भक्ति और प्रेम से रिझाया जा सकता है। कथा के पांचवें दिन उन्होंने भगवान की बाल लीलाओं का प्रसंग सुनाया। इसके साथ ही कालिया नाग उद्धार, गोवर्धन पूजा के बारे में विस्तार से बताया। आनंद आश्रम के मंत्री अनिल अग्रवाल, अध्यक्ष प्रेम शंक...