बांदा, जुलाई 13 -- Banda News: बांदा। कृषि विज्ञान केंद्र में सोमवार को जनपद में तिल उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से 50 किसानों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.श्याम सिंह ने किसानों को तिल बोने के आधुनिक तकनीकी उपाय बताए। 'तिल में पोषक तत्व प्रबन्धन' विषय पर हुई कृषक प्रशिक्षण कार्यशाला में उन्होंने कहा कि तिल तिलहनी फसल है। इसके अच्छे उत्पादन एवं गुणवत्ता के लिए सल्फर का प्रयोग महत्वपूर्ण है। तिल की फसल में प्रति हेक्टेयर 10 टन गोबर की खडी खाद जरूरी है। सिंचित दशा में 60 किलो नत्रजन, 40-40 किलो फास्फोरस व पोटाश, 30 किलो सल्फर प्रति हेक्टेयर की दर से पूरी मात्रा बुवाई के समय ही प्रयोग करनी चाहिए। असिंचित दशा में इन सभी की मात्रा को आधा कर दें। नैनो डीएपी 10 मिली प्रति किलो की दर से बीजोपचार करने से लाभ होता है। बुवाई के 25-...