बलिया, नवम्बर 8 -- Balia News: बलिया। नगर स्थित राजकीय आयुर्वेद अस्पताल की प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी ने बताया कि दीवाली के दिन पटाखों को छोड़ने की परम्परा प्राचीन काल से है। इस दिन आमतौर पर जो पटाखे जलाये जाते हैं, उनसे खासतौर से सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन, मोनो आक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड के साथ ही साथ वायु में सूक्ष्म कण तथा भारी धातुएं, जैसे- कैडमियम, अल्यूमिनियम एवं मैगजीन का भी उत्सर्जन होता है, जो अंतत: वायु की गुणवत्ता को प्रभावित करता है एवं वायु प्रदूषित हो जाती है, जो स्वास्थ्य के लिए खासकर श्वांस के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक होता है। यह भी पढ़ें- Bareily News: सांस-हृदयरोगियों के लिए खतरनाक है पटाखों का शोर और धुआं डॉ. तिवारी ने बताया कि वायु गुणवत्ता सूचकांक से मापी जाती है। 50 से कम सूचकां...