बलिया, अक्टूबर 29 -- Balia News: बलिया, संवाददाता। त्यौहारों के साथ अब लगन की भी शुरूआत होने वाली है। ऐसे में शहर से गांव तक के बाजारों में मिठाइयों की डिमांड बढ़ गई है। उद्योग शून्य जिले में किसान और पशुपालकों की आजीविका का मुख्य स्रोत खेती-किसानी के साथ दुग्ध उत्पादन है। यही ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार भी है। जनपद में दुग्ध का रोजाना उत्पादन औसतन तीन से साढ़े तीन लाख लीटर है। जबकि डिमांड और खपत इससे कई गुना अधिक है। जिले की सहकारी दुग्ध समिति करीब एक साल से बंद है। ऐसे में निजी डेयरी सुधा, ज्ञान, मदर डेयरी, नमस्ते, अमूल और काशी डेयरी पशुपालकों से हर दिन लगभग एक लाख लीटर दुग्ध की खरीदारी कर शहर और कस्बा तक आपूर्ति करती है। यह भी पढ़ें- Biharsharif News: मिलावट का बाजार गर्म, बिक रहा नकली मावा-पनीर, जांच के नाम पर महकमा मौन उत्पादन...