बहराइच, अक्टूबर 19 -- Bahraich News: बहराइच, संवाददाता । मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की लीला के वर्णन में रावण के बिना लीला असंभव है। रावण के उद्धार को ही धरा पर प्रकटे भगवान विष्णु के रूप की लीला के अंतिम चरण में युग भीमकायं रावण के पुतले का आकर्षण बाल वृन्द में ही नहीं हर वर्ग में है। महंगाई के इस में भी रावण के पुतले की ऊंचाई में रामलीला का एक तिहाई बजट लग जाता है। कभी इन पुतलों को श्रीराम निषाद गढ़ते थे। फिर बेटा पप्पू निषाद, अब प्रह्लादी व सहयोगी रावण, मेघनाद व कुम्भकर्ण के पुतले दो सप्ताह से गढ़ रहे हैं। शहर की रामलीला तीसरी पीढ़ी में पहुंच गई है। यह भी पढ़ें- Mau News: 500 साल पुरानी रामलीला की परंपरा, ग्रामीण बनाते हैं रावण का पुतला वर्ष 1905 में संगठित रूप से रामलीला का मंचन शहर भर में एक ही स्थान से होता आ रहा है। जगह भले ही बदल...