बागपत, अक्टूबर 24 -- Bagpat News: बड़ौत। आचार्य आर्जव सागर महाराज ने कहा कि मोह और लालच से मुक्त होकर ही मनुष्य जीवन में सच्चे सुख और मानसिक शांति का अनुभव कर सकता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य जिन वस्तुओं, संबंधों और सुख-सुविधाओं को अपना मानकर उनसे अत्यधिक लगाव रखता है, कई बार वही उसके दुख और चिंता का कारण बन जाते हैं। इच्छाओं की पूर्ति के लिए निरंतर प्रयास करने के बावजूद मनुष्य की तृष्णा समाप्त नहीं होती। वास्तविक संतोष के लिए आवश्यक है कि व्यक्ति अपनी जरूरतों और अनावश्यक लालसाओं के बीच अंतर समझे। आचार्य ने कहा कि मनुष्य अक्सर वस्तुओं और संबंधों को स्थायी मानकर उनसे बहुत अधिक अपेक्षाएं जोड़ लेता है। जब परिस्थितियां उसकी इच्छाओं के अनुरूप नहीं रहतीं, तो निराशा, क्रोध और मानसिक तनाव पैदा होने लगता है। सभा का संचालन ब्रह्मचारिणी ऋषिका दीदी ने क...