बागपत, अगस्त 6 -- Bagpat News: बड़ौत। अजितनाथ सभागार में प्रवचन करते हुए आचार्य आर्जव सागर ने कहा कि लोग तीन प्रकार के होते हैं। एक तो श्रोता की तरह जो सुनता है, दूसरा सोता जो कि झपकियां लेता है और तीसरा सरोंता की तरह जो बातों को काटने वाला होता है। इन तीन में से हमें श्रोता बनना चाहिए। निग्र्रन्थ साधु जो अपने आवश्यक में लीन रहते हैं। 28 मूलगुणों का सदैव पालन करते हैं। वैराग्य का चिंतन करते हैं। ऐसे वे गुरु आर्ष परंपरा से चली आई वीतराग वाणी को, भगवान की वाणी को देने वाले होते हैं। भगवान की वाणी सीधी- सीधी हम लोग ग्रहण नहीं कर सकते क्योंकि उसके लिए गणधर की आवश्यकता होती है। आचार्य श्री नें कहा कि ध्यान से सुनने वाले ही श्रोता कहलाते हैं। सभा में ऋषिका दीदी ने भी मंगलाचरण किया। सभा में मुकेश जैन, प्रदीप जैन, नवीन जैन, वरदान जैन, अंकुर जैन, व...