Araria News: विलुप्त होती जा रही है मिथिला और कोसी इलाके की लोक परंपराएं
अररिया, सितम्बर 23 -- Araria News: प्रभात किरण भरगामा, निज संवाददाता कैसे खेले जइबो सावन में कजरिया, बदरिया घिर आयो रे ननदी... जैसे पारंपरिक कजरी गीत किसी जमाने में कोसी व मिथिलाचल के गांवों में सावन भादो के दिनों में गांव की गलियां, आंगन और बाग बगीचों में सुनाई पड़ती थी। लेकिन लोक संस्कृति से जुड़ी यह परंपराएं बदलते समय, बदलती जीवन शैली और प्रकृति के बदले मिजाज के बीच अब धीरे-धीरे सिमटती जा रही है। जी हां हम बात कर रहे हैं मिथिला और कोसी इलाके की लोक परंपराएं कजरी, पचीसी आदि का । बताया जा रहा है कि सावन - भादो को कभी प्राकृतिक रमणीयता और लोक संस्कृति की समृद्ध ऋतु माना जाता था। इस दौरान कोसी व मिथिलांचल के इलाके में कजरी गायन, पचीसी सहित अन्य पारंपरिक आयोजन बड़े पैमाने पर आयोजित किये जाते थे, लेकिन बदले समय और प्रकृति के बदले मिजाज के साथ अ...
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