नई दिल्ली, फरवरी 26 -- भगवान्‌ श्रीकृष्ण ने पद्मपुराण में इस कथा का महत्व बताया है। उन्होंने बताया कि अब मैं आपको उस एकादशी के बारे में बताता हूं, जिसे राजा मान्धाता के पूछने पर महात्मा वसिष्ठ ने कहा था। फाल्गुन शुक्ल पक्षकी एकादशी का नाम आमलकी एकादशी है। ऐसा कहा जाता है, जो इस एकादशी का व्रत करता है, वो विष्णुलोक को जाता है। त्रेतायुग में एक बार राजा मांधाता ने ऋृषि वशिष्ट जी से अनुरोध किया कि अगर आप मुझ पर प्रसन्न हैं, तो कोई ऐसा व्रत बताएं, जिससे मेरा हर प्रकार से कल्याण हो। उन्होंने कहा, वैसे तो सभी व्रत उत्तम है, लेकिन सबसे उत्तम है, आमलकी एकादशी व्रत। इस व्रत को करने से सभी पापों का नाश होता है। इस व्रत को करने से एक हजार गायों के दान के बराबर फल मिलता है। यहां पढ़ें इस व्रत की कथा-महात्मा वसिष्ठ ने पहले बताया आमलकी वृक्ष का महत्व ब...