नई दिल्ली, अप्रैल 14 -- वर्तमान में कुछ लोग व्रत का मतलब अन्न-जल का त्याग या फलाहार करना ही मानने लगे हैं। व्रत का वास्तविक अर्थ है, व्यक्ति अपने दुर्गणों को दूर करने का संकल्प ले और अच्छे कर्म करे। इस दिन दान करने का भी विशेष महत्व है। यह दान किसी जरूरतमंद को देना ज्यादा अच्छा है। ज्योतिष शास्त्र में कुछ तिथियों को विशेष संज्ञाएं देते हुए उन्हें अखंड, अचल, अनंत तथा अक्षय माना गया है। जब कभी कोई विशिष्ट घटना किसी तिथि विशेष को घटित हुई, तब उस तिथि को विशेष महत्वदायिनी कहा गया। बैसाख शुक्ल पक्ष तृतीया को त्रेता युग की आदि तिथि होने के कारण अक्षय तृतीया कहा गया है। इस बारे में बता रहे हैं बीएचयू के पूर्व प्रोफेसर, गिरिजा शंकर शास्त्रीकौन थे परशुराम अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का जन्म महर्षि जमदग्नि की पत्नी रेणुका ...