नई दिल्ली, जून 5 -- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। लोग ChatGPT से सवाल पूछ रहे हैं, AI से फोटो बना रहे हैं, वीडियो तैयार कर रहे हैं और ऑफिस के कई काम भी AI की मदद से कर रहे हैं। लेकिन अब UN की एक चौकाने वाली रिपोर्ट सामने आई जिसके मुताबिक, अगर AI इसी रफ्तार से यूज होता रहा तो साल 2030 तक AI डेटा सेंटर्स की पानी की खपत 130 करोड़ लोगों की सालाना घरेलू जरूरत के बराबर पहुंच सकती है। दरअसल AI को चलाने वाले बड़े-बड़े डेटा सेंटर्स को ठंडा रखने के लिए भारी मात्रा में पानी की जरूरत पड़ती है। यही वजह है कि विशेषज्ञ अब AI की "हिडन कॉस्ट" यानी छिपी हुई कीमत पर चर्चा कर रहे हैं। AI के बढ़ते उपयोग से जहां काम आसान हो रहे हैं, वहीं पानी, बिजली और जमीन जैसे संसाधनों पर दबाव भी तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आन...