नई दिल्ली, अप्रैल 18 -- 19 अप्रैल 2026, दिन - रविवार को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाएगा। अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त के तौर पर भी जाना जाता है। हिंदू पंचांग में कुछ ऐसी विशेष तिथियां होती हैं, जिस दिन बिना मुहूर्त देखे भी कोई भी शुभ कार्य शुरू किया जा सकता है। इन्हें अबूझ मुहूर्त या स्वयंसिद्ध मुहूर्त कहा जाता है। इन दिनों ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति इतनी अनुकूल होती है कि हर शुभ काम अपने आप फलदायी हो जाता है। अक्षय तृतीया इनमें सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। लेकिन साल में कुछ और तिथियां भी अबूझ मुहूर्त के रूप में जानी जाती हैं। अबूझ मुहूर्त में विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यापार शुरू करना, गहना खरीदना या बच्चों के संस्कार जैसे शुभ कार्य बिना कोई पंचांग देखे किए जा सकते हैं।अबूझ मुहूर्त क्या है और क्यों खास है? अबूझ मुहूर्त का मतलब है 'ऐसा समय, जो ख...