मेरठ, मार्च 1 -- हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत रचना के मुख्य जिनालय में चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 21वें दिन शनिवार को सर्वप्रथम मंत्रोच्चारण पूर्वक भगवान आदिनाथ का अभिषेक तथा शांतिधारा की गई। शनिवार को 99 परिवारों ने विधान में भाग लेकर पुण्य अर्जन किया। विधान में मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि संसार में दो ही मार्ग है पहला योग एवं दूसरा भोग। योग सन्यास का व भोग संसार का मार्ग है। योग प्रभुता की यात्रा व भोग पशुता की ओर ले जाता है। योग विरक्ति व भोग आसक्ति को जन्म देता है। संयम ही तुम्हारे भीतर बैठे भोग को मिटाता है और स्वयं को बांधता है। स्वर्ण कलश से भगवान का अभिषेक अरुण जैन एवं शांतिधारा सुरेश जैन,, दीपक जैन ने की। आरती का दीप संगीता जैन,, युवांश जैन ने प्रज्ज्वलित किया। सायंकाल में भगवान आदिनाथ की आरती की गई। रात्रि में गुरुक...