रायबरेली, जुलाई 19 -- रायबरेली संवाददाता। स्वच्छ भारत मिशन के तहत सामुदायिक शौचालय तो बन गए लेकिन उनका लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। प्रतिमाह 88 लाख खर्च करने के बाद भी खुले में शौच नहीं बंद हुआ। कई शौचालय तो ऐसे हैं जो बिना चले ही ध्वस्तीकरण की ओर चल पड़े हैं। कुछ तो सुबह खुल जाते हैं लेकिन कुछ ही समय में वो बंद हो जाते हैं। यह प्रक्रिया सप्ताह में एक या दो बार ही होती है। स्वच्छ भारत अभियान के तहत जनपद के सभी 980 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया। इनके संचालन के लिए गांव के ही एक महिला समूह को चिन्हित कर संचालन शुरू किया गया। माना यह गया कि गांव का समूह रहेगा तो संचालन बेहतर तरीके से किया जा सकेगा। हाल यह है कि 980 सामुदायिक शौचालय के संचालन में प्रत्येक माह 5880000 रुपये मानदेय के रूप में दिए जाते हैं, जब...