नई दिल्ली, अक्टूबर 2 -- हेमलता कौशिक दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि पत्नी को दिए जाने वाले गुज़ारा-भत्ते को तय करते समय पति के बैंक के लेनदेन के ब्यौरे को अपने-आप उसकी महीने की खर्च-योग्य आय के बराबर नहीं माना जा सकता। जस्टिस मधु जैन की पीठ ने यह बात एक पत्नी की उस याचिका को खारिज करते हुए कही, जिसमें उसने फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए अंतरिम गुज़ारा-भत्ते की रकम बढ़ाने की मांग की थी। पीठ ने साफ किया कि कमाने वाले जीवनसाथी की आय का एक निश्चित प्रतिशत तय करके गुज़ारा-भत्ता तय नहीं किया जा सकता।पीठ को दोनों पक्षों की आर्थिक स्थिति और उचित जरूरतों का कुल मिलाकर आकलन करना चाहिए। याचिकाकर्ता पत्नी ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उसे 15 हजार रुपए प्रति माह का अंतरिम गुज़ारा-भत्ता दिया गया था। फैमिली कोर्ट ने उसके पति की मासिक आय 80 हजा...