औरंगाबाद, जून 25 -- ​हसपुरा प्रखंड के अमझर शरीफ गांव में सांप्रदायिक सद्भाव की एक ऐसी अनूठी तस्वीर देखने को मिलती है, जो देश की गंगा-जमुनी तहजीब को जीवंत करती है। यहां पिछले सात दशकों से स्थानीय हिंदू परिवार न केवल मुहर्रम के मौके पर ताजिया बना रहा है, बल्कि अखाड़े का नेतृत्व भी करता है। धर्म और मजहब की दीवारों से ऊपर उठकर यह परिवार आपसी भाईचारे की मिसाल पेश कर रहा है।

परंपरा का आरंभग्रामीण भोला कुरैशी ने बताया कि यह परंपरा लगभग 70 साल पहले स्व. धनेश्वर चौधरी ने शुरू की थी। उनके पुत्र राम ईश्वर चौधरी, कमंडल चौधरी और रामचंद्र चौधरी के पुत्र आज भी उस विरासत को पूरी श्रद्धा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। परिवार का मानना है कि यह परंपरा उनके लिए केवल एक कार्य नहीं, बल्कि अटूट आस्था का विषय है।

समर्पण और कड़ी मेहनतउन्होंने बताया कि एक बार किन्हीं ...