नई दिल्ली, जून 19 -- आमिर खान की फिल्म थ्री इडियट्स का एक डॉयलॉग है कि काबिल बनो, कामयाबी झक मारकर पीछे भागेगी। किसी भी कर्मचारी की कामयाबी का मतलब है उसकी योग्यता के मुताबिक सैलरी का मिलना। क्योंकि नौकरी के दौरान होने वाली सैलरी की बातचीत अक्सर यह दिखा देती है कि कोई कंपनी किसी उम्मीदवार को कितनी अहमियत देती है। एक ऐसी ही घटना का जिक्र करने जा रहे हैं जिसमें एक एंप्लॉई के लिए उचित वेतन की मांग से शुरू हुई बातचीत आत्मसम्मान, करियर ग्रोथ और अपनी असली कीमत पहचानने का सबक बन गई। यह भी पढ़ें- नौकरी जाने के बाद बदली किस्मत, 70 हजार से 1.58 लाख रुपये महीना पहुंची सैलरीक्या है पूरा मामला दरअसल, दिल्ली की एक को-फाउंडर कनिका जैन ने सोशल मीडिया पर एक उम्मीदवार का अनुभव शेयर किया। उन्होंने बताया कि एक उम्मीदवार इंटरव्यू में बेहतर सैलरी की उम्मीद लेक...