गाजीपुर, मार्च 10 -- गाजीपुर, संवाददाता। मजदूरों का पलायन रोकने के लिए स्थानीय तौर पर रोजगार उपलब्ध कराने की कोशिशों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। क्योंकि मजदूरों को काम तो मिला, लेकिन तीन महीने से मजदूरी नहीं मिली। इससे उनके समक्ष रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है। बच्चों की परवरिश करना भी मुश्किल हो गया है। मजदूरी में विलंब के कारण सक्रिय मजदूरों की संख्या भी घटने लगी है। पंजीकृत तीन लाख 52 हजार श्रमिक है। इसमें करीब 60 हजार श्रमिक एक्टिव है। जिसमें से 50 हजार श्रमिकों का तीन माह से मानदेय नहीं मिला है। अब यह श्रमिक विभागीय हीलाहवाली से परेशान हो गये है। श्रमिक को गांव में ही रोजगार मिले, इसके लिए मनरेगा शुरू हुआ था। जिसमें काम करने के लिए गाजीपुर में तीन लाख 52 हजार श्रमिकों ने पंजीयन कराया। हालांकि नियमित काम नहीं मिलने से फिर श्रमिको...