सहारनपुर, मार्च 1 -- देवबंद। रमज़ान-उल-मुबारक इबादत, रहमत और इंसानी हमदर्दी का महीना माना जाता है। इस पाक महीने में रोज़ेदारों के लिए सदक़ा-ए-फित्र अदा करना वाजिब बताया गया है। जिससे गरीब और जरूरतमंद लोग भी ईद-उल-फित्र की खुशियों में उनके साथ शामिल हो सकें। उलेमा के अनुसार सदका-ए-फित्र अदा करने से समाज में भाईचारा एवं सहयोग की भावना को बल मिलता है। दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मुफ्ती आरिफ कासमी ने इस्लामी शिक्षाओं के हवाले से बताया कि हर साहिब-ए-निसाब (जिसके पास अपनी जरुरत से ज्यदा हो) मर्द हो चाहे महिला उन्हें अपनी ओर से तथा अपने नाबालिग बच्चों की ओर से भी सदक़ा-ए-फित्र अदा ईद की नामज से पूर्व अदा करना चाहिए। जिससे जरूरतमंदों तक समय रहते मदद पहुंच सके। मुफ्ती आरिफ कासमी ने बताया कि सदक़ा-ए-फित्र अनाज या उसकी कीमत प्रति व्यक्ति के रूप ...
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