प्रयागराज, अप्रैल 2 -- Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1982 में एटा में हुई गोली मारकर हत्या और जला देने के मामले में जीवित बचे एकमात्र आरोपी जाहर सिंह को 44 साल बाद संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। साथ ही सेशन कोर्ट से मिली उम्रकैद की सजा रद्द कर दी। यह निर्णय न्यायमूर्ति सिद्धार्थ एवं न्यायमूर्ति जेके उपाध्याय की खंडपीठ ने महाराज सिंह व अन्य की अपील पर उसके अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय और सरकारी वकील को सुनने के बाद दिया है। अन्य अपीलार्थियों की अपील लंबित रहने के दौरान मृत्यु हो चुकी है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन संदेह से परे अपराध साबित करने में नाकाम रहा। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि अपीलार्थी ने देशी पिस्तौल से फायर किया था। उसके हत्या में लिप्त होने के सबूत नहीं मिले। सेशन कोर्ट ने भी सीआरपीसी की ध...