नई दिल्ली, अक्टूबर 2 -- 43 साल की कानूनी लड़ाई के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1982 में अपनी पत्नी की गला घोंटकर हत्या करने के जुर्म में पति और उसके साथी को दोषी ठहराया। 1984 के बरी होने के फैसले को पलटते हुए अवधेश कुमार और माता प्रसाद को भूत भगाने के बहाने हत्या के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। कोर्ट ने सबूत नष्ट करने के लिए जुर्माना और तीन साल की सजा भी सुनाई। यह मामला 6 अगस्त, 1982 का है, जब उस समय 28 वर्षीय अवधेश कुमार पर अपनी 23 वर्षीय पत्नी कुसुमा देवी की गला घोंटकर हत्या करने का आरोप लगा था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, कुमार को अपने छोटे भाई की पत्नी के साथ अवैध संबंध में पकड़े जाने के बाद कुसुमा ने विरोध किया। इसके बाद अवधेश, माता प्रसाद और दो अन्य साथियों ने मिलकर कुसुमा को पकड़ लिया और उसका गला घोंट दिया। घटना को छिपाने के लि...