इस्लामाबाद, जुलाई 8 -- पाकिस्तान में आसमान छूती महंगाई ने आम अवाम की कमर तोड़ दी है। हालत यह हो गई है कि वहां अब सिर्फ जिंदगी गुजारना ही नहीं, बल्कि 'मरना' भी खर्चीला हो गया है। आर्थिक तंगी का आलम यह है कि रावलपिंडी जैसे शहरों में गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को अपने प्रियजनों के अंतिम संस्कार के लिए भी कर्ज लेना पड़ रहा है। भले ही सरकारी आंकड़े अर्थव्यवस्था में सुधार का दावा कर रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से कोसों दूर है। बमुश्किल से रोटी का जुगाड़ करने वाली गरीब आवाम अब अपनों की अंतिम विदाई का भी बोझ नहीं उठा पा रही है।अंतिम संस्कार भी बना बड़ा वित्तीय संकट 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की एक रिपोर्ट के हवाले से सामने आया है कि रावलपिंडी में कम आय वाले परिवारों के लिए कफन-दफन अब एक बड़ा आर्थिक संकट बन गया है। पहले पड़ोसी और स्थानीय ल...