गया, मार्च 1 -- मगध के साथ गया जी की होली पूरे सूबे में प्रसिद्ध है। समय के साथ होली का स्वरूप बदला गया। 40-50 सालों में मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध झूमटा का स्वरूप शहर की सड़कों से निकलर गलियों में आ गया है। होली के पर्व पर नयापन और पाश्चात्य संस्कृति की हवा ऐसे छा गई है होली में बहुत कुछ बदल सा गया है। ऐसे भी गया जी की होली अन्य स्थानों की होली से थोड़ी अलग रही और यहां का झूमटा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रहा। जब हाथी-घोड़े और ढोल-नगाड़ों के साथ भारी भीड़ के बीच जब होली के दूसरे दिन झूमकर झूमटा निकलता तो देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते। शहर की सड़कों पर लंबी दूरी में रहे झूमटा देखने के लिए छतों पर भारी भीड़ होती। काजू, किशमिश, छुहाड़ा,बादाम,अखरोट,पिस्ता, इलायची,सौंफ आदि से बना हुआ मलाईदार ठंडई झूमटा के रंग दोगुना गाढ़ा कर देता। लेकिन, ...
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