कार्यालय संवाददाता, जुलाई 10 -- बिहार के विश्वविद्यालयों में नई शिक्षा नीति के तहत चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम को लेकर बड़ी उलझन पैदा हो गई है। दरअसल, 7.5 सीजीपीए से कम अंक प्राप्त करने वाले छात्रों को ऑर्डिनेंस एंड रेगुलेशन में संशोधन कर उनको सातवें सेमेस्टर में प्रवेश की अनुमति तो मिल गई, लेकिन इन छात्रों के शोध (रिसर्च) से जुड़े पेपर को लेकर कोई वैकल्पिक सिलेबस तय नहीं किया गया है। छठे सेमेस्टर में रिसर्च मेथोडॉलजी पेपर और आठवें सेमेस्टर में 12 क्रेडिट के रिसर्च प्रोजेक्ट व डिजर्टेशन को लेकर संशय और गहरा गया है। सवाल यह उठ रहा है कि जिन छात्रों को 7.5 सीजीपीए की कमी के कारण चार वर्षीय शोध डिग्री नहीं मिलेगी, वे इन पेपर्स को क्यों पढ़ेंगे और उनका मूल्यांकन किस आधार पर होगा। 7.5 सीजीपीए से कम अंक वाले छात्रों को यदि शोध नहीं करना है, तो ...