ज्योतिर्विद पंडित दिवाकर त्रिपाठी, अक्टूबर 3 -- शनिवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने के शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। शनि प्रदोष व्रत संतान की प्राप्ति, संतान की उन्नति व संतान के कल्याण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। शनि प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को संतान से संबंधित सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है।उसके बाद त्रयोदशी तिथि लग जाएगी। इस कारण से प्रदोष का व्रत 4 अक्टूबर दिन शनिवार को किया जाएगा। इस दिन गोधूलि समय में भगवान पद्मनाभ एवं शनि देव की साथ-साथ भगवान सदाशिव भोलेनाथ की आराधना माता पार्वती के साथ अवश्य करना चाहिए। शास्त्रों में कहा गया है कि जब प्रदोष व्रत शनिवार के दिन प्राप्त होता है तो उसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाएगा। शनि प्रदोष व्रत को संतान से संबंधित किसी भी समस्या के समाधान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। आश्विन शुक्ल...