रांची, सितम्बर 22 -- रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 1990 के गोलीकांड में लक्ष्मीकांत दास की सजा में संशोधन करते हुए धारा 307 आईपीसी की जगह धारा 324/34 आईपीसी के तहत दोषी माना। अदालत ने सात वर्ष की सजा के स्थान पर उसके द्वारा जेल में बितायी गयी पांच माह 15 दिन की अवधि को ही सजा माना। साथ ही आर्म्स एक्ट की धारा 27 के आरोप से उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। मामला सरायकेला थाना क्षेत्र के घाघी गांव का है। 13 जून 1990 को घासीराम महतो और कंद्रू महतो बाउंड्री कर रहे थे। अभियोजन के अनुसार, विवाद के दौरान गोली चली, जिससे तीन लोग घायल हुए थे। यह भी पढ़ें- सामान्य तलाशी में कारतूस मिला, इसे गुप्त हथियार रखना नहीं मान सकते : हाईकोर्ट ट्रायल कोर्ट ने 2003 में लक्ष्मीकांत को धारा 307 में सात वर्ष और आर्म्स एक्ट में तीन वर्ष की सजा सुनाई थी। लंबी...