रांची, सितम्बर 17 -- साल 1995 में 100 रुपये रिश्वत लेने के आरोप में शुरू हुआ एक मामला 31 साल बाद भी खत्म नहीं हुआ है। हटिया रेलवे स्टेशन के तत्कालीन पार्सल क्लर्क काली शंकर धोबी को अब 75 वर्ष की उम्र में एक बार फिर जेल जाना होगा। झारखंड हाईकोर्ट ने रिश्वत मामले में दोषसिद्धि बरकरार रखा है, लेकिन तीन दशक से अधिक समय तक चले मुकदमे, अधिक उम्र, बीमारियों और पहली बार अपराध में दोषी पाए जाने को देखते हुए सजा को न्यूनतम स्तर तक कम कर दिया है। जस्टिस प्रदीप श्रीवास्तव की अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मामले में दोषसिद्धि में हस्तक्षेप का आधार नहीं है, लेकिन असाधारण रूप से लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया को देखते हुए सजा में कमी की जा सकती है। अदालत ने उनकी जमानत भी रद्द करते हुए दो महीने के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। ऐसा नहीं करन...