रांची, जनवरी 29 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद के एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि यदि विवाह से पहले पति द्वारा महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए जाते हैं और पत्नी की सहमति धोखे से ली जाती है, तो ऐसा विवाह कानून की नजर में टिकाऊ नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप जैसी गंभीर जानकारी छिपाना धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है और इससे विवाह निरस्त किया जाना पूरी तरह न्यायसंगत है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की खंडपीठ ने गढ़वा फैमिली कोर्ट के 16 फरवरी 2017 के फैसले को बरकरार रखते हुए विवाह को शून्य घोषित करने के आदेश को सही ठहराया। क्या है मामला प्रियंका साही और सिद्धार्थ राव उर्फ राहुल का विवाह 2 दिसंबर 2015 को गोरखपुर में हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुआ था। विवाह से पहले 'छेका' की रस्...