3 साल की उम्र में कंप्यूटर चलाया, 17 की उम्र में CBSE के सिस्टम तक को हिलाया; कौन हैं सार्थक सिद्धांत?
संजय मौर्य, जून 4 -- आज पूरे देश में सार्थक सिद्धांत का नाम CBSE की ऑन स्क्रीन मार्किंग यानी OSM सिस्टम की खामियों को सामने लाने की वजह से चर्चा में है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि तकनीक को लेकर उनकी समझ कोई अचानक पैदा हुई चीज नहीं है। इसके पीछे बचपन से चला आ रहा उनका लगाव और सीखने का सफर है। सार्थक ऐसे घर में बड़े हुए जहां कंप्यूटर हमेशा उनके आसपास मौजूद रहे। उनके माता-पिता का संबंध कंप्यूटर इंजीनियरिंग से रहा है, जबकि उनके पिता एक कंप्यूटर अकादमी भी चलाते थे। ऐसे माहौल में तकनीक से उनका परिचय बहुत छोटी उम्र में ही हो गया था। कहा जाता है कि जब दूसरे बच्चे खिलौनों से खेल रहे होते हैं, तब सार्थक ने महज तीन साल की उम्र में कंप्यूटर का माउस चलाना शुरू कर दिया था। बचपन से ही कंप्यूटरों के बीच रहने की वजह से उनकी तकनीक में दिलचस्पी बढ़ती गई...
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