नई दिल्ली, जून 19 -- दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐसे शख्स को राहत देने से इनकार कर दिया है, जिसने 28 साल पहले यानी साल 1998 में दहेज के लालच में अपनी पत्नी की जलाकर हत्या कर दी थी। इस मामले में साल 2002 में निचली अदालत ने सिराजुद्दीन नाम के व्यक्ति को उम्र कैद और जुर्माने की सजा सुनाई थी। आरोपी ने अपनी इसी सजा को उच्च न्यायालय में चुनौती देते हुए दोषसिद्धि को रद्द करने की मांग की थी। उसका कहना था कि अदालत का फैसला मूलतः मृतक के मृत्यु पूर्व दिए गए तीन बयानों पर आधारित है, जो कि आपस में मेल नहीं खाते और इसलिए सजा का अकेला आधार नहीं बन सकते। हालांकि हाई कोर्ट ने उसकी इस दलील को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने एकबार फिर मामले के तमाम सबूतों (जिसमें मरने से पहले दिया गया बयान भी शामिल है) को देखने-सुनने के बाद शख्स को राहत देने से इनकार कर दिया और उसक...