नई दिल्ली, मई 22 -- अधिकमास यानी पुरुषोत्तम मास में पड़ने वाला प्रदोष व्रत अत्यंत दुर्लभ और शक्तिशाली माना जाता है। साल 2026 में ज्येष्ठ अधिकमास 17 मई से 15 जून तक चल रहा है। इस दौरान 28 मई 2026, गुरुवार को अधिकमास का पहला प्रदोष व्रत रखा जाएगा। चूंकि यह व्रत गुरुवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस दुर्लभ संयोग में भगवान शिव की पूजा से चंद्र दोष, शनि दोष और अन्य ग्रह दोषों से मुक्ति मिलने की प्रबल संभावना होती है।गुरु प्रदोष व्रत की तिथि और मुहूर्त ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 28 मई 2026 को सुबह 7:56 बजे शुरू होगी और 29 मई को सुबह 9:50 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, व्रत 28 मई गुरुवार को रखा जाएगा। प्रदोष काल में शिव पूजा का विशेष महत्व है। इस बार का गुरु प्रदोष कई शुभ योग बना रहा है, जो भक...