धनबाद, फरवरी 28 -- सांसें लगभग थम चुकी थीं। घरवालों ने उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन 23 दिनों तक डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की लगातार जंग ने आखिरकार मौत को मात दे दी। यह चमत्कार हुआ धनबाद मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विभाग में। मंडरो निवासी विपिन कुमार और उनकी पत्नी बेबी देवी के लिए 4 फरवरी की शाम किसी किसी डरावने सपने से कम नहीं थी। जन्म के तुरंत बाद उनका नवजात बेहद नाजुक हालत में था। उसका वजन बेहद कम था, सांस लेने में दिक्कत थी। बर्थ एस्फिक्सिया और शॉक जैसी जटिल समस्याएं भी थीं। परिजन घबराए हुए थे। बच्चे को तुरंत एनआईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष शुरू हुआ। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ अविनाश और उनकी टीम ने हालात की गंभीरता को देखते हुए पहले पांच दिनों तक नवजात को वेंटिलेटर पर रखा। हर पल उसकी नाजुक सांसों पर नजर रखी गई। धी...
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